Prem Darshan (प्रेम दर्शन)
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प्रेम है द्वार, प्रेम है मार्ग और प्रेम ही है प्राप्ति। मनुष्य की भाषा में ‘प्रेम’ से ज्यादा बहुमूल्य और कोई शब्द नहीं। लेकिन बहुत कम सौभाग्यशाली लोग हैं जो प्रेम से परिचित हो पाते हैं। क्योंकि प्रेम की पहली शर्त ही आदमी पूरी नहीं कर पाता।
ISBN: 978-81-7261-394-5
Cover: HARD COVER
Details
ध्यान साधना शिविर, भावनगर में ध्यान-प्रयोगों सहित हुई सीरीज के अंतर्गत दी गईं चार OSHO Talks
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