कैवल्य उपनिषद – Kaivalya Upanishad

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" सम्मोहन को हिंदू शास्त्रों ने माया कहा है। हम जो भी कर रहे हैं, जो भी हैं, जो भी हमारी चित्तदशा है, वह सब हमारा सम्मोहन है। आप सुखी हैं, दुखी हैं, वह आपका सम्मोहन है। लेकिन आपको पता भी नहीं है, इसलिए बदलाहट बड़ी मुश्किल पड़ती है। बड़ी मुश्किल पड़ती है बदलाहट करना। अगर आप दुखी हैं और किसी से कहो कि यह तुम्हारा सम्मोहन है कि तुम दुखी हो, तो वह मानने को राजी नहीं होगा, क्योंकि बदल नहीं सकता। लेकिन सम्मोहन के आप प्रयोग करें तो आप चकित ही हो जाएंगे। एक व्यक्ति को सम्मोहित करके लिटा दें, फिर उसको प्याज का टुकड़ा दे दें और कह दें कि यह सेब है, वह खाएगा और कहेगा सेब है। फिर आप उसके मुंह में मिट्टी डाल दें और कहें कि यह मिठाई है और वह मिठाई की तरह ही भाव पैदा करेगा चेहरे पर। स्वाद लेगा, आनंदित होगा और कहेगा बहुत मीठा है… '--ओशो

ISBN: 978-0-88050-959-6
No. of Pages: 168
Cover: HARD COVER

Details

ध्यान साधना शिविर, माउंट आबू में हुई प्रवचनमाला के अंतर्गत ओशो द्वारा कैवल्य उपनिषद के सूत्रों पर दिए गए सत्रह प्रवचन