Gahre Pani Paith (गहरे पानी पैठ)

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"तीर्थ है, मंदिर है, उनका सारा का सारा विज्ञान है।
और उस पूरे विज्ञान की अपनी सूत्रबद्ध प्रक्रिया है।…

एक भी कदम बीच में खो जाए, एक भी सूत्र बीच में खो जाए, तो परिणाम नहीं होता।

जिन गुप्त तीर्थों की मैं बात कर रहा हूं उनके द्वार हैं, उन तक पहुंचने की व्यवस्थाएं हैं, लेकिन उन सबके आंतरिक सूत्र हैं।
इन तीर्थों में ऐसा सारा इंतजाम है कि जिनका उपयोग करके चेतना गतिमान हो सके।"—ओशो
पुस्तक के अन्य विषय-बिंदु:
  • मंदिर के आंतरिक अर्थ
  • तीर्थ: परम की गुह्य यात्रा
  • तिलक-टीके: तृतीय नेत्र की अभिव्यंजना
  • मूर्ति-पूजा: मूर्त से अमूर्त की ओर
  • ISBN: 978-81-7261-246-7
    No. of Pages: 152
    Cover: HARD COVER

    Details

    मंदिर, तीर्थ, तिलक-टीके, मूर्ति-पूजा पर वुडलैंड, मुंबई में प्रश्नोत्तर सहित हुई सीरीज के अंतर्गत दी गईं चार OSHO Talks