Es Dhammo Sanantano, Vol. 03 (एस धम्मो सनंतनो—भाग तीन)

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मौन में खिले मुखरता
भारत में एक अनूठी परंपरा रही है कि जब फिर कोई बुद्धपुरुष हो तो अतीत के बुद्धपुरुषों की वाणी को पुनरुज्जीवित करे। तुम्हारे हस्ताक्षर हटाए; तुमने जो धूल-धवांस इकट्ठी कर दी है चारों तरफ, उसे हटाए; दर्पण को फिर निखराए, फिर उघाड़े।

थोड़ी ही देर के लिए धर्म शुद्ध रहता है, बड़ी थोड़ी देर के लिए! तुम्हारे सुनते ही उपद्रव शुरू हो गया। तुम संगठन करोगे। तुम संप्रदाय बनाओगे, तुम शास्त्र निर्मित करोगे। वे शास्त्र, वे संप्रदाय, वे सिद्धांत, वे धर्म तुम्हारे होंगे--बुद्धपुरुषों के नहीं। बुद्धपुरुषों का तो बहाना होगा। धीरे-धीरे उनका बहाना भी हट जाएगा। लकीरें रह जाएंगी--मुर्दा। ओशो
ISBN: 978-81-7261-379-2
No. of Pages: 266
Cover: HARD COVER

Details

भगवान बुद्ध की सुललित वाणी धम्मपद पर प्रश्नोत्तर सहित पुणे में हुई सीरीज के अंतर्गत दी गईं 122 OSHO Talks में से 10 (21 से 30) OSHO Talks