Suno Bhai Sadho (सुनो भई साधो)
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सत्य जब बोलता है तो कोहराम मच जाता है अंधेरे तलघरों में। सत्य पर प्रहार होते हैं कि वह मुखर न हो सके--और इस सबके बीच सत्य और महिमामंडित होकर खिलता है। यह पुस्तक रेखांकन है इसी जीवंत घटना का।
"कबीर अनूठे हैं। और प्रत्येक के लिए उनके द्वारा आशा का द्वार खुलता है। क्योंकि कबीर से ज्यादा साधारण आदमी खोजना कठिन है। और अगर कबीर पहुंच सकते हैं, तो सभी पहुंच सकते हैं। कबीर निपट गंवार हैं, इसलिए गंवार के लिए भी आशा है; बे-पढ़े-लिखे हैं, इसलिए पढ़े-लिखे होने से सत्य का कोई भी संबंध नहीं है। "— Osho
"कबीर अनूठे हैं। और प्रत्येक के लिए उनके द्वारा आशा का द्वार खुलता है। क्योंकि कबीर से ज्यादा साधारण आदमी खोजना कठिन है। और अगर कबीर पहुंच सकते हैं, तो सभी पहुंच सकते हैं। कबीर निपट गंवार हैं, इसलिए गंवार के लिए भी आशा है; बे-पढ़े-लिखे हैं, इसलिए पढ़े-लिखे होने से सत्य का कोई भी संबंध नहीं है। "— Osho
ISBN: 978-81-7261-298-6
No. of Pages: 270
Cover: HARD COVER
Details
कबीर-वाणी पर पुणे में हुई सीरीज के अंतर्गत दी गईं दस OSHO Talks
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