Sahaj Mile Avinashi (सहज मिले अविनाशी)

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प्रेम ही जीवन है, प्रेम ही मंदिर है, प्रेम ही पूजा है, इस सत्य का उदघाटन ओशो ने संत पलटू के वचनों पर बोलते हुए किया है। प्रेम के स्वरूप को समझाते हुए ओशो कहते हैं : ‘मैं तो चाहूंगा कि अब प्रेम के मंदिर हों।
ISBN: 978-81-7261-420-1
Cover: HARD COVER

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मित्रों व प्रेमियों के छोटे-छोटे समूहों के बीच प्रश्नोत्तर सहित ओशो द्वारा दी गई सात अंतरंग OSHO Talks का संग्रह