Apne Mahin Tatol (अपने माहिं टटोल)
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"हम सब आनंद चाहते हैं, हम सब शांति चाहते हैं, हम सब तृप्ति चाहते हैं। लेकिन हम खोजते हैं बाहर। वहीं भूल है। खोजना है भीतर, टटोलना है अपने में – अपने माहिं टटोल।
अगर हम भीतर जागकर देख सकें तो वहां जो है वही परमात्मा है, वही मोक्ष है, वही निर्वाण है। फिर उसे कोई कोई नाम दे दे, इससे कोई भेद नहीं पड़ता। वहां जो है वही परम आनंद है, वही परम सत्य है।"—ओशो
अगर हम भीतर जागकर देख सकें तो वहां जो है वही परमात्मा है, वही मोक्ष है, वही निर्वाण है। फिर उसे कोई कोई नाम दे दे, इससे कोई भेद नहीं पड़ता। वहां जो है वही परम आनंद है, वही परम सत्य है।"—ओशो
ISBN: 978-81-7261-189-7
No. of Pages: 208
Cover: PAPER BACk
Details
ध्यान साधना शिविर, उदयपुर में प्रश्नोत्तर सहित हुई सीरीज के अंतर्गत दी गईं दस OSHO Talks
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